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शिक्षा मतलब बच्चों का समग्र विकास: परांजपे
इंदौर.केवल परीक्षा पास कर लेना ही शिक्षा का उददेश्य नहीं है. शिक्षा का मतलब बालक का समग्र विकास होना है. जिसमें शारीरिक, बौद्विक और आत्मिक स्तर पर उसको समर्थ बनाना है. यह बात वरिष्ट शिक्षा विद माधव परांजपे ने समाजसेवा प्रकोष्ट द्वारा तंगबस्ती के बच्चों के लिए आयोजित आठ दिवसीय नि:शुल्क व्यक्तित्व विकास शिविर के सांतवे दिन बच्चों का मार्ग दर्शन करते हुए कही. श्री परांजपे ने कुछ प्रेरक कहानियां सुनाते हुए कहा कि जीवन में एक सूत्र बहुत महत्वपूर्ण है. वह है हेल्प एवर, हार्ट नेवर यानि हमेशा सबकी मदद करो और कभी किसी को दुख या कष्ट न पहुंचाओ. उन्होंने तुलसीदास की प्रसिद्व उक्ति परहित सरिस धरम नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई का उदाहरण भी दिया.तंगबस्ती के शिविरार्थाे बच्चों को आज सूत्रधार संस्था के सत्यनारायण व्यास के सहयोग से ख्यात निर्देशक फणी मजूमदार द्वारा बनाई गई फिल्म मुन्ना भी दिखाई गई. राष्ट्रीयता और आपसी सद्वाव पर केंद्रित इस माॢमक फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद यात्रा और उनके निधन से संबंधित कुछ दुर्लभ दृश्य भी शामिल है.इस मौके पर पर्यावरण प्रेमी व ख्यात फोटोग्राफर पद्वश्री भालू मोढ़े ने भी इंदौर के सिरपुर तालाब के पक्षी अभ्यारण्य से संबंधित सुदर फिल्मों का प्रदर्शन भी करवाया. रोज की तरह योगाचार्य बाला चैतन्य और सुश्री आरती द्विवेदी ने योगाभ्यास तथा विजय सुपेकर ने पर्यावरण गीत का गायन अभ्यास कराया.पुष्पा महाडिक, अर्चना घोडपकर एवं वंदना मुक्तिबोध ने बालगीत सिखलाये. अतिथियों का स्वागत आलोक खरे, केएल निहोरे, आर.सी. चक, विजय रांगनेकर, चंद्रेश ठक्कर आदि ने किया. संचालन श्याम पांडे ने और आभार प्रदर्शंन ब्रजेश कानूनगो ने किया.


